यादों के बहुत से झरोखे होते हैं। किसी भी समय कोई एक झरोखा एक झोंके से खुल जाता है और हम यादों में खो जाते हैं। एक याद से जुड़कर दूसरी याद, दूसरे से तीसरी, आगे और बढ़ते हुए पुराने जीवन में कुछ समय के लिए पहुँचा देती है। ऐसी ही कुछ यादों में से बचपन और युवावस्था से जुड़ी मेरी प्रतिदिन की दिनचर्या में घुली-मिली गौरैया, एक झरोखे से दिखती है।
